हम सोचते हैं कि अगर पत्रकारिता की पढ़ाई कर लें तो हमें पत्रकार बनने से कोई नही रोक सकता। भाई साहेब अगर ऐसा होता तो लोग पत्रकारिता की पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर बैंक और रेलवे की तैयारी में नहीं जुट जातें। एक पत्रकार बनने के लिए जरुरी है कि आप मांसिक एंव शारीरिक दोनों रूपों से तैयार रहें। मैं अपने जीवन में इस क्षेत्र से जुड़े अब तक जितने भी लोगों से मिला हूँ चाहे वो कोई हमारा दोस्त हो या फिर कोई पत्रकारिता का छात्र लगभग वे सब लाचार होकर ही इस क्षेत्र में आऐं हैं क्योंकि इससे पहले उनमें से कुछ लोगों ने तो 2-3 सालों तक मेडिकल की तैयारी की तो किसी ने इंजिनियरिंग की, कुछ ने आई.एस की तो कुछ ने यू.पी.एस की। परंतु निराशा हाथ लगने के बाद उन्होंने पत्रकारिता की राह चुनी क्योंकि उन्हें ऐसा लगता था कि अब यही एक राह बची है जिसमें थोड़ी सी मेहनत करने के बाद उन्हें नौकरी आसानी से मिल जाऐगी। और वैसे भी सिनेमा जगत वालों ने इस क्षेत्र को इतना ज्यादा मसहूर किया है कि बच्चें बिना कुछ सोचे इसके चकाचौंध को बिना समझे इस क्षेत्र में आने के लिए उत्साहित रहते हैं। परंतु गलती इसमें उनकी नही होती, गलती तो सिनेमा जैसे माध्यमों की है जो मिडिया के एक ही रूप को लोगों के बीच लाता है जो जगमगाती चकाचौंध से भरी होती है क्योंकि ये मिडीया की बाहर की दुनिया होती है और दूसरे रूप की चर्चा करने में हिचकिचाता है क्योंकि मिडीया का दूसरा रूप बहुत ही भयानक है क्योंकि ये मिडीया हाउस के अंदर होने वाले प्रकियाओं को दर्शाता है। यहां एक पत्रकार के उपर संपादक का और संपादक के उपर मिडीया हाउस के संचालक का काम के प्रति दवाब इतनी ज्यादा होती है कि कभी-कभी वो अपनी जिंदगी से हतास हो जाता है। जितना राजनीति और शोषण इस क्षेत्र में होता है मेरे ख्याल से शायद ही ये किसी ओर क्षेत्र में होता होगा। इस क्षेत्र में नौकरी लेने जाओ तो संपादक का सबसे पहला सवाल ही यही होता है कि महिने में कितना लोगो । भाईसाहेब, यहां अपनी बोली खुद ही लगानी पड़ती है। यहां न तो नौकरी आसानी से मिलती है और न ही सुकून। परंतु, अगर आपका उद्देश्य बचपन से ही पत्रकार बनने का रहा हो, तब तो आपको इस क्षेत्र में आगे बढ़ने से कोई भी नही रोक सकता। मिडीया की चकाचौंध से आप अपने आपको बचाएं और यह तय कर के ही इस क्षेत्र में अपना कदम रखे की आपको पत्रकार बनना है तो बनना है चाहे इस राह में किसी भी तरह की परेशानियों का सामना क्यों न करना पड़े आप पीछे नही हटेंगे। किस्मत में लिखी हर मुश्किल टल जाती है, हो बुलन्द हौसले तो मंजिल मिल जाती है। सिर उठा कर जो आसमान को देखो, गगन को छूने की प्रेरणा मिल जाती है।
Saturday, June 18, 2011
पत्रकार बनना इतना आसान नही.......... बहुत लंबी है प्रक्रिया ।
हम सोचते हैं कि अगर पत्रकारिता की पढ़ाई कर लें तो हमें पत्रकार बनने से कोई नही रोक सकता। भाई साहेब अगर ऐसा होता तो लोग पत्रकारिता की पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर बैंक और रेलवे की तैयारी में नहीं जुट जातें। एक पत्रकार बनने के लिए जरुरी है कि आप मांसिक एंव शारीरिक दोनों रूपों से तैयार रहें। मैं अपने जीवन में इस क्षेत्र से जुड़े अब तक जितने भी लोगों से मिला हूँ चाहे वो कोई हमारा दोस्त हो या फिर कोई पत्रकारिता का छात्र लगभग वे सब लाचार होकर ही इस क्षेत्र में आऐं हैं क्योंकि इससे पहले उनमें से कुछ लोगों ने तो 2-3 सालों तक मेडिकल की तैयारी की तो किसी ने इंजिनियरिंग की, कुछ ने आई.एस की तो कुछ ने यू.पी.एस की। परंतु निराशा हाथ लगने के बाद उन्होंने पत्रकारिता की राह चुनी क्योंकि उन्हें ऐसा लगता था कि अब यही एक राह बची है जिसमें थोड़ी सी मेहनत करने के बाद उन्हें नौकरी आसानी से मिल जाऐगी। और वैसे भी सिनेमा जगत वालों ने इस क्षेत्र को इतना ज्यादा मसहूर किया है कि बच्चें बिना कुछ सोचे इसके चकाचौंध को बिना समझे इस क्षेत्र में आने के लिए उत्साहित रहते हैं। परंतु गलती इसमें उनकी नही होती, गलती तो सिनेमा जैसे माध्यमों की है जो मिडिया के एक ही रूप को लोगों के बीच लाता है जो जगमगाती चकाचौंध से भरी होती है क्योंकि ये मिडीया की बाहर की दुनिया होती है और दूसरे रूप की चर्चा करने में हिचकिचाता है क्योंकि मिडीया का दूसरा रूप बहुत ही भयानक है क्योंकि ये मिडीया हाउस के अंदर होने वाले प्रकियाओं को दर्शाता है। यहां एक पत्रकार के उपर संपादक का और संपादक के उपर मिडीया हाउस के संचालक का काम के प्रति दवाब इतनी ज्यादा होती है कि कभी-कभी वो अपनी जिंदगी से हतास हो जाता है। जितना राजनीति और शोषण इस क्षेत्र में होता है मेरे ख्याल से शायद ही ये किसी ओर क्षेत्र में होता होगा। इस क्षेत्र में नौकरी लेने जाओ तो संपादक का सबसे पहला सवाल ही यही होता है कि महिने में कितना लोगो । भाईसाहेब, यहां अपनी बोली खुद ही लगानी पड़ती है। यहां न तो नौकरी आसानी से मिलती है और न ही सुकून। परंतु, अगर आपका उद्देश्य बचपन से ही पत्रकार बनने का रहा हो, तब तो आपको इस क्षेत्र में आगे बढ़ने से कोई भी नही रोक सकता। मिडीया की चकाचौंध से आप अपने आपको बचाएं और यह तय कर के ही इस क्षेत्र में अपना कदम रखे की आपको पत्रकार बनना है तो बनना है चाहे इस राह में किसी भी तरह की परेशानियों का सामना क्यों न करना पड़े आप पीछे नही हटेंगे।
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